Meerut’s Traditional Gajak and Rewri Awarded GI Tag

मेरठ की गजक और रेवड़ी को मिला GI टैग: यूपी की मिठास को मिली वैश्विक पहचान

उत्तर प्रदेश की पारंपरिक मिठाइयों ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। मेरठ की गजक और रेवड़ी को भौगोलिक संकेतक (GI – Geographical Indication) टैग मिलना न केवल स्थानीय कारीगरों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह भारतीय खाद्य विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में भी एक अहम कदम है। यह टैग प्रमाणित करता है कि इन मिठाइयों की विशिष्टता, स्वाद और गुणवत्ता सीधे तौर पर मेरठ की मिट्टी, मौसम और पारंपरिक निर्माण विधियों से जुड़ी है।

GI टैग क्या है और क्यों है खास?

GI टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक उत्पत्ति से जोड़ता है। इसका मतलब है कि वह उत्पाद अपनी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताओं के कारण उसी क्षेत्र में बना होना चाहिए।

मेरठ की गजक और रेवड़ी को GI टैग मिलने से:

नकली या मिलते-जुलते उत्पादों पर रोक लगेगी

कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों को बेहतर दाम मिलेगा

निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे

पारंपरिक रेसिपी और तकनीकों का संरक्षण होगा

गजक उत्तर भारत की सर्दियों की पहचान मानी जाती है, और मेरठ की गजक का नाम आते ही मुंह में मिठास घुल जाती है। तिल और गुड़ से बनने वाली यह मिठाई न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी फायदेमंद मानी जाती है।

मेरठ की गजक की खासियत है:

 

पतली, कुरकुरी परत

 

तिल और गुड़ का संतुलित अनुपात

 

पारंपरिक हथौड़े से पीटकर बनाई जाने वाली तकनीक

 

पीढ़ियों से कारीगर इस कला को सहेजते आ रहे हैं, जिसमें अनुभव और धैर्य सबसे बड़ी पूंजी है।

 

यूपी की मिठास, दुनिया के नाम

 

मेरठ की गजक और रेवड़ी को GI टैग मिलना इस बात का संकेत है कि भारत की पारंपरिक खाद्य विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक और मूल्यवान है। यह उपलब्धि न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

 

अब जब भी कहीं मेरठ की गजक या रेवड़ी का नाम लिया जाएगा, तो उसके साथ जुड़ी होगी प्रामाणिकता, परंपरा और गुणवत्ता की मुहर—एक ऐसी मिठास, जिसे दुनिया भर में सराहा जाएगा।

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